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स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग कार्यशाला

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स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग में शुक्रवार को राष्ट्रिय वेबिनार एवं कार्यशाला का आयोजन विभागाध्यक्ष प्रो0 डाॅ0 पूजा गुप्ता के नेत्तृव में हुआ। उन्होंने बताया कि चित्रकलाओं में परम्परागत एवं आधुनिक शैलियों के वर्चस्व के लिये देशभर से कला साधक आॅनलाईन जुडें। उनके मध्य कलाओं मे नवीन शैलियाॅ एवं प्रयोग, कम्प्यूटर ग्राफिक्स, डिजीटल आर्ट मार्केट, मूर्तिकला एवं कैलीग्राफी में सम्भावनाओं पर चर्चा हुई। इस राष्ट्रिय वेबिनार एवं कार्यशाला का शुभारम्भ मुख्य अतिथि डाॅ0 वी0 पी0 सिंह कुलपति सुभारती विश्वविद्यालय एवं प्राचार्य डाॅ0 पिन्टू मिश्रा ने सम्बोधित कर किया। कुलपति डाॅ0 वी0 पी0 सिंह ने कहां की जीवन के हर स्तर पर कलाओं का वर्चस्व देखा जा सकता है ललित कलाओं में असिमित विकल्प है यह इतना विस्तृत विषय बन चुका है इसे जितना गहराई से जानों और ज्यादा जानने की जिज्ञासा होती है। यह सीप में मोती के समान है सामान्य लोग कलाकृतियों की प्रशंसा करते हैं उन्हें केवल सौन्दर्य का उत्पाद न समझकर सृजनात्मकता से जोड़ना चाहिये। फाइन आर्ट विभाग मे आकर नव ऊर्जा का संचार होता है। प्राचार्य प्रो0 पिन्टू मिश्रा ने सभी अतिथियों का स्वागत ंिकया एवं सभी को अपने आशिर्वचन दिये और सुभारती के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। डाॅ0 पूजा गुप्ता ने विभाग की रिपोर्ट प्रस्तुत की एवं संचालन किया। डाॅ0 सोनल भारद्वाज एवं डाॅ0 अंशु श्रीवास्तव ने आमन्त्रित कलाकारों का परिचय दिया। आरम्भिक सत्र में डाॅ0 अर्चना रानी विभागाध्यक्ष दृश्य कला विभागः चित्रकला, आर0 जी0 पी0 जी0 काॅलेज ने चित्रकला में विविध शैलियों का प्रारूप विषय पर कहा कि किस प्रकार चित्रकला में पारम्परिक शैलियों ने आज भी अपनी पहचान बनायी है। वह आधुनिक शैली की जननी बनी और नित नवीन प्रयोगों द्वारा पल्लवित हुई। कला बन्धन मुक्त होनी चाहिए। जिस प्रकार नये-नये आयाम उभर कर सामने आ रहे है जैसे पेन्टिंग में एन्ग्रेविंग, ग्राफिक, रिवर्स पेन्टिंग का चलन जोर पर है। उससे प्रतीत होता है कि कला अत्याधुनिक हो गई है। इस अवसर पर ललित कला विभाग, महात्मा गाॅधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के विभागाध्यक्ष डाॅ0 सुनील विश्वकर्मा ने लाईव व्यक्ति चित्र बनाकर कार्यशाला का शुभारम्भ किया कुछ ब्रश स्ट्रोकस द्वारा उन्होनें मिनटों में व्यक्ति चित्रण की बारीकियों को समझाया। उनके साथ ही डाॅ0 रितु संगल अध्यक्ष कल्चर चैराहा संस्थान ने नवीन रूप में मीनाकारी द्वारा चित्रों का सृजन करना सिखाया। दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार एवं कार्यशाला में दिल्ली से शशि, प्रज्ञा मुम्बई से विकास त्यागी, कानपुर से डाॅ0 वन्दना, डाॅ0 अमिता शुक्ला अलीगढ से डाॅ0 अन्नता, फराह मेरठ से डाॅ0 नाजिमा इरफान, शाहबात, आदि सम्मिलित हुए। आशीष मिश्रा ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया।

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