तीन दिवसीय रंग कबीर: संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक उत्सव
अवधारणा
संत कबीर भारतीय समाज के ऐसे महापुरुष हैं जिन्होंने अपनी गहन दार्शनिक सोच, सरल लेकिन प्रभावशाली काव्यधारा और समाज सुधार की भावना के माध्यम से सदियों से मानवता के हित में मार्गदर्शित किया है। उनकी रचनाएं न केवल आध्यात्मिक उन्नयन का मार्ग प्रशस्त करती हैं, बल्कि सामाजिक समरसता, धार्मिक सहिष्णुता और मानवता के उच्चतम आदर्शों का संदेश भी देती हैं। कबीर ने जाति, धर्मऔर पंथ की सीमाओं को तोड़कर एक सार्वभौमिक चेतना का आवाह्न किया, जो आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक है।उनकी रचनाओं में वह सामर्थ्य है जो समाज की कुरीतियों, अंधविश्वासों एवं विभेदों को चुनौती देती हैं। कबीर के दोहे सरल भाषा में गूढ़ सत्य का उद्घाटन करते हैं, जो हर वर्ग और आयु के लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। आज के युग में, जब समाज सांस्कृतिक विघटन, असहिष्णुता और मानसिक तनाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे मेंकबीर के संदेश हमें एकता, प्रेम और सहिष्णुता का पाठ पढ़ाते हैं।
इसलिए उनकी अमूल्य विरासत को संरक्षित करना, उसका सम्यक् अध्ययन करना तथा उसे युवा पीढ़ी तक प्रभावी रूप से पहुंचाना हमारा सामाजिक और नैतिक दायित्व है। युवा वर्ग को कबीर के विचारों से परिचित कराकर हम समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन और सांस्कृतिक जागरूकता ला सकते हैं।इसी उद्देश्य से संत कबीर अकादमी, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश, भारतएवं भाषा विभाग, कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के संयुक्त तत्त्वावधानमें तीन दिवसीय कबीर: संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक उत्सवका आयोजन महत्त्वपूर्ण हो जाता है। इस कार्यक्रम में विद्वान, कलाकार एवं शोधार्थी कबीर की शिक्षाओं और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभावों पर चर्चा करेंगे। यह आयोजन कबीर की विरासत को जीवंत करते हुए समाज में समरसता और मानवतावाद को बढ़ावा देगा।
उद्देश्य
- कबीर की विचारधारा को पुनः सक्रिय रूप से साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच पर स्थापित करना।
- विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं एवं आम जन को कबीर की शिक्षाओं से अवगत कराना।
- क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर लोक एवं जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में योगदान देना।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सार्थक संवाद को बढ़ावा देना।
मुख्य विषय : आधुनिकता में कबीर
उप-विषय
- कबीर का जीवन और दार्शनिक दृष्टि
- कबीर का निर्गुण भक्ति दर्शन और आधुनिक धार्मिक विमर्श
- जातिवाद और सामाजिक समरसता
- कबीर और स्त्री विमर्श
- कबीर और वैश्वीकरण
- कबीर का तर्कवाद और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
- पर्यावरणीय चेतना और कबीर
- समकालीन लेखकों पर कबीर का प्रभाव
- कबीर और साम्प्रदायिक सद्भाव
- कबीर का भाषा-शिल्प और आधुनिक संचार माध्यम – सोशल मीडिया, लोकगीत, नाटक व मंचन में प्रयोग
- आधुनिक दर्शन और पश्चिमी चिंतन के साथ कबीर की तुलनात्मक प्रासंगिकता
- आधुनिक युग में कबीर की महत्ता
Main Topic: Locating Kabir in the Framework of Modernity
Sub-topics:
- Kabir’s Life and Philosophical Vision
- Kabir’sNirguna Bhakti Philosophy and Modern Religious Discourse
- Casteism and Social Harmony
- Kabir and Feminist Discourse
- Kabir and Globalization
- Kabir’s Rationalism and Scientific Outlook
- Environmental Consciousness and Kabir
- The Influence of Kabir on Contemporary Writers
- Kabir and Communal Harmony
- Kabir’s Language and Style in Modern Communication Media – Use in Social Media, Folk Songs, Drama, and Performances
- Comparative Relevance of Kabir with Modern Philosophy and Western Thought
- The Significance of Kabir in the Modern Age
शोध पत्र एवं सारांश हेतु दिशा निर्देश
- शोध सारांश 250 शब्दों में तथा पूर्ण शोधपत्र 2000 से 2500 शब्दों होना चाहिए। सन्दर्भ सूची से युक्त मौलिक शोधपत्र वर्ड फाइल में भेजना है।
- शोधपत्र हिंदीया अंग्रेजी किसी भी भाषा में लिखा जा सकता है, हिंदी- फांट यूनिकोड, साईज 14 में ही होने चाहिए।/English- MS Word, Times New Roman, Font 12.
- शोध सारांश भेजने की अंतिम तिथि- 09सितंबर 2025
- शोध पत्र भेजने की अंतिम तिथि- 09सितंबर 2025
- आयोजक संस्था से मार्गव्यय देय नहीं होगा।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ, उत्तर प्रदेश अधिनियम 2008 के तहत स्थापित एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय है, जिसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा मान्यता प्राप्त है। यह विश्वविद्यालय महायान थेरवाद वज्रयान बौद्ध धार्मिक और धर्मार्थ ट्रस्ट के तत्त्वावधान में संचालित है, जिसने शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसे NAAC के द्वारा इसे ‘A’ ग्रेड प्रदान किया गया है। विश्वविद्यालय का मुख्य परिसर ‘सुभारतीपुरम’ के नाम से जाना जाता है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के निकट, दिल्ली बाईपास रोड पर स्थित है। लगभग 250 एकड़ में फैला यह परिसर भव्य भवनों, हरे-भरे उपवनों और उत्कृष्ट खेल सुविधाओं से सुसज्जित है। यहाँ मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग, इंजीनियरिंग, प्रबंधन, विधि, शिक्षा, पत्रकारिता, कला एवं विज्ञान सहित अनेक विषयों में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले संघटक महाविद्यालय हैं। विश्वविद्यालय में दूरस्थ शिक्षा के विभिन्न पाठ्यक्रम भी संचालित होते हैं, जिन्हें UGC की मान्यता प्राप्त है। शिक्षा, सेवा, संस्कार एवं राष्ट्रीयता के प्रति समर्पित यह विश्वविद्यालय प्रतिष्ठित विश्वस्तरीय संस्थान के रूप में पहचान बना चुका है।
भाषा विभाग
सुभारती विश्वविद्यालय केएक संबद्ध विभाग के रूप में वर्ष 2019 में भाषा विभाग की स्थापना की गई। विभाग ने तब से भाषाओं और साहित्य के अध्ययन, शिक्षण और अनुसंधान में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। विभाग का मार्गदर्शक सिद्धांत ऋग्वेद की ऋचा से प्रेरित है: “आ नो भद्रा क्रतवो यन्तु विश्वतः” जो समृद्ध भारतीय सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप, विभाग वर्तमान में हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी में स्नातक पाठ्यक्रम संचालित हैं तथा हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी में परास्नातक एवं पीएचडी के साथ-साथ विद्यार्थियों की भाषाई क्षमता में वृद्धि हेतु फ्रेंच, कोरियन,हिंदी एवं अंग्रेजी भाषाओं में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी संचालित किये जा रहे हैं I
संत कबीर अकादमी, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश
संत कबीर अकादमी, उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग के अंतर्गत स्थापित एक महत्त्वपूर्ण संस्थान है, जिसका उद्देश्य संत कबीर की जीवन-दृष्टि, साहित्य, दर्शन और सामाजिक चेतना का संरक्षण, संवर्द्धन तथा प्रसार करना है। संत कबीर भारतीय संत परंपरा के ऐसे महामनीषी थे जिन्होंने निर्गुण भक्ति, सामाजिक समानता और मानवता के सार्वभौमिक मूल्यों को अपने काव्य और वाणी के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया। अकादमी का कार्य इन्हीं विचारों को वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों तक जीवंत रूप में पहुँचाना है।
यह अकादमी शोध, प्रकाशन, सेमिनार, संगोष्ठी और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से कबीर साहित्य और दर्शन की प्रासंगिकता को रेखांकित करती है। अकादमी द्वारा कबीर पर केंद्रित शोध पत्रिकाएँ, पुस्तिकाएँ और ग्रंथ प्रकाशित किए जाते हैं, साथ ही कबीर की जयंती और अन्य सांस्कृतिक पर्वों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विभिन्न विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और साहित्यकारों के सहयोग से यह अकादमी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कबीर विचारधारा का प्रसार भी करती है।अकादमी का प्रमुख उद्देश्य समाज में व्याप्त अंधविश्वास, जातिवाद और असमानता के विरुद्ध कबीर की उदात्त मानवीय दृष्टि को प्रचारित करना है। यह संस्था न केवल साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में कार्य कर रही है, बल्कि नई पीढ़ी में नैतिक मूल्यों, सहिष्णुता और सामाजिक समरसता की चेतना विकसित करने का भी प्रयास कर रही है।
इस प्रकार, संत कबीर अकादमी भारतीय सांस्कृतिक धरोहर की सजीव वाहक है, जो संत कबीर की अमर वाणी और उनके क्रांतिकारी संदेश को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में सार्थकता प्रदान करती है।
मुख्य संरक्षक
प्रो. (डॉ.) अतुल कृष्ण
माननीय संस्थापक सुभारती समूह
डॉ.स्तुति नारायण कक्कड़
माननीय कुलाधिपति, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ
संरक्षक
प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार शर्मा
माननीय कुलपति, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ
प्रो. (डॉ.) शल्या राज
मुख्य कार्यकारी अधिकारी, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ
डॉ. कृष्णमूर्ति
कार्यकारी अधिकारी, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ
मार्गदर्शक
प्रो. सुधीर त्यागी
अधिष्ठाता, कला एवं सामाजिक संकाय, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ
संयोजक
डॉ. सीमा शर्मा,अध्यक्ष
भाषा विभाग,कला एवं सामाजिक संकाय, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ
आयोजन समिति
डॉ. रफत खानम
एसोसिएट प्रोफेसर, भाषा विभाग
डॉ. निशि राघव
सहायक प्रोफेसर, भाषा विभाग
डॉ. यशपाल
सहायक प्रोफेसर, भाषा विभाग
डॉ. स्वाति शर्मा
वरिष्ठ व्याख्याता, भाषा विभाग
श्री अंकित
सहायक प्रोफेसर, भाषा विभाग
डॉ. आशीष कुमार
सहायक प्रोफेसर, भाषा विभाग